
चंदा मामा क्यों बैठे हो
बादल के पीछे आंखे मीचे
तारों से तुमने कर ली क्या कटटी
दूर खडे़ हो गुमसुम अकेले
आंखे बंदकर दस तक गिनूंगा
आ जाना तुम छत पर मेरे
पापा से कहकर दिलवा दूंगा
ढेर सारे तुमको खिलौने
मम्मी बना देगी हलवा पूड़ी
खा लेंगे हम थोड़ी थोड़ी
नींद लगेगी तो सो जाना
मीठे सपनों में खो जाना
4 comments:
वाह !! हर बच्चे का चंदा मामा से जुडाव कुछ ऐसा ही होता है..
वाह बबलू वाह!
आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.
आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.
बहुत खूब भाई। मन को छू गया। काश मैं भी बच्चा होता और आप इस तरह की कविता सुनाते। यह सोचकर मन रोमांचित हो उठता है।
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