Wednesday, January 28, 2009

तितली रानी



तितली रानी तितली रानी
पंख तुम्हारे प्यारे-प्यारे
टैटू तुमने बनवाए या
बच्चों ने मारे गुब्बारे
या फूलों का रंग चुराकर
तुमने खुद को रंग डाला है

मैं तुमसे कट्टी कर लूंगी
वर्ना सच्ची बात बता दो
मम्मी-पापा से कह कर
मुझको ऐसे पंख दिला दो

संग तुम्हारे मंडराऊंगा
सबके जी को ललचाऊंगा
जब जाना होगा स्कूल
पंख लगाकर उड़ जाऊंगा

Monday, January 19, 2009

हाथी दादा सेहत का राज तो बताओ



हाथी दादा हा्थी दादा
कौन सा खाना खाते हो
इतनी अच्छी सेहत कैसे
चाट-पकौड़ी खाते हो


नहीं चूहे बेटे
मैंने हरी पत्तियां खाईं
पीता हूं गन्ने का रस
इसलिए हरदम रहता मस्त


हम दोनों है शाकाहारी
पर मैं पतला तुम हो भारी
क्या है मुझे कोई बीमारी
मुझको डाॅक्टर को दिखला दो
टॅानिक-वानिक कोई दिला दो



हा हा हा हा चूहे बेटे
क्या हुआ जो तुम हो छोटे
इस दुनिया में लाखों जीव
सबकी अलग-अलग पहचान
कोई छोटा कोई मोटा
कोई गोरा कोई काला
तुम रहते धरती के अंदर
मछली रहती पानी में
मैं धरती पर दौड़ लगाता
चिडिया उडती है नभ में
सबसे मिलकर बनती धरती
रंग-बिरंगी न्यारी-प्यारी
चिंता छोड़ो घर को जाओ
हुई रात सोने की बारी

Thursday, January 15, 2009

मैं भी हीरो बन सकता हूं



बिल्लू बंदर फैशन का मारा
सारा जंगल उससे हारा
पढ़ना लिखना उसे न भाता
सूट पहनकर डिस्को जाता
अपनी सूरत देख-देखकर
मन ही मन में खूब इतराता
मैं भी हीरो बन सकता हूं
शाहरुख से मिलता-जुलता हूं
कर दूंगा मैं सबकी छुट्टी
बस एक चांस दिला दे कोई
बिल्लू की मम्मी परेशान
एक दिन उसके पकड़े कान
जमकर चपत लगाई दो
बिल्लू रोया हूऽऽहूऽऽ होऽऽ होऽऽ

Thursday, January 1, 2009

जाओ जाओ सर्दी


जाओ जाओ सर्दी जी
गर्मी जी को आने दो
स्वेटर और रजाई को
बक्से में पहुंचाने दो
कोहरे की चादर को ओढे
ऊंघते रहते सूरज दादा
सर्दी हवा लगती है जैसे
टीचर ने मारा हो तमाचा
झपकी जैसे छोटे दिन हैं
रातें कोई लंबी सडक
जान पे मेरी बन आई है
पर क्या है तुमहें कोई फरक
भूल चुके हैं खेलकूद सब
घर में दुबके रहते हम
कांप रहे हैं थरथर थरथर
अब तो ले लेने दो दम

Monday, December 22, 2008

थैंक्यू मम्मी




रंग-बिरंगे ऊन के गोले
मम्मी लाई भर के झोले
रात-रातभर जाग-जाग कर
बुन डाला एक सुंदर स्वेटर
स्वेटर पर दो फूल बने हैं
फूलों पर मंडराती तितली
जब मैं इसको पहन निकलती
ठंडक को भी लगती गर्मी
थैंक्यू मम्मी थैंक्यू मम्मी

Monday, December 15, 2008

मेरी प्यारी रजाई



मेरी रजाई गरम-गरम
इसके अंदर सोते हम
यह मुझसे भी भारी है
लेकिन मुझको प्यारी है
ठंडक से लड़ जाती है
सर्दी से दूर भगाती है
मुझको अपनी गोद में लेकर
परी लोक तक जाती है
जब गर्मी आ जाती है
ये बक्से में छिप जाती है

Saturday, December 13, 2008

मंगल ब्रश क्यों नहीं करता-२


जारी---

तुम तो बिलकुल बुद्धू हो। मंगल ने बबलू को डांटा मम्मी आसमान में चली जाएगी तो फिर तुमहें प्यार कौन करेगा‍ । मेरी मममी तो मुझे खूब प्यार करती हैं बबलू ने कहा । बेचारे मंगल की मम्मी नहीं है तो उसे कौन प्यार करता होगा । बबलू ने मन में सोचा । उसे मंगल के बारे में सोचकर बहुत दुख हो रहा था । मंगल तुमहें कौन प्यार करता है संजू ने पूछा । मंगल ने बताया कि उसे उसकी नानी प्यार करती है बहुऽऽत सारा प्यार मंगल ने अपने दोनों हाथों को फैलाते हुए कहा । लेकिन मुझे मम्मी की भी बहुत याद आती है मंगल ने बताया । जब मैं बहुत छोटा था तभी मम्मी भगवान मे पास चली गई थीं । मंगल ने बताया । नानी बोलती है जो लोग अच्छे होते हैं उन्हें भगवान अपने पास बुला लेते हैं । मेरी मम्मी भी तो बहुत अच्छी है । बबलू ने मन में सोचा । अगर मेरी मम्मी भगवान के पास चलीं जाएंगी तो मुझे कोई प्यार करने वाला नहीं होगा । मेरी तो नानी भी मुझे से बहुत दूर रहती हैं बबलू ने सोचा ।
कल से मैं मम्मी को कभी तंग नहीं करूंगा। बबलू ने सोचा। अगली सुबह मम्मी ने बबलू से कहा कि चलो ब्रश कर लो तो बबलू झट से तैयार हो गया । मम्मी ने कहा अरे वाह मेरा बेटा तो बहुत समझदार हो गया है मम्मी को समझ में ही नहीं आ रहा था कि बबलू आखिर इतना समझदार कैसे हो गया।